U19 World Cup के सेमीफाइनल मुकाबले में धुआंधार बल्लेबाजी करने वाले एरोन जॉर्ज केरल के रहने वाले हैं. उन्होंने 4 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू किया और आज भारत का एक चमकता सितारा बन गए हैं.
एरोन जॉर्ज, भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे हैं.
केरल के कोट्टायम में जन्मे और हैदराबाद में पले-बढ़े एरोन जॉर्ज आज भारतीय क्रिकेट का चमकता सितारा बन चुके हैं. अंडर-19 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल मुकाबले में इस धुरंधर ने अपनी धुआंधार पारी की बदौलत भारत को सेमीफाइनल में पहुंचाया. उन्होंने 104 बॉल पर 115 रन की शानदार पारी खेली थी. वह इस अंडर-19 वर्ल्डकप के नॉकआउट में तीसरी सबसे बड़ी पारी खेलने वाले सितारे बन गए हैं. खास बात ये है कि इस टूर्नामेंट में एरोन ने लगातार अपने शानदार प्रदर्शन को कायम रखा है.
कोट्टायम में जन्में एरोन का परिवार हैदराबाद में शिफ्ट हुआ. वहां उनके पिता ईसो वर्गीज पुलिस सब इंस्पेक्टर थे. वह खुद भी एक प्रतिभाशाली लेफ्ट आर्म स्पिनर थे, लेकिन सही कोचिंग और मौके न मिलने की वजह से उनका क्रिकेटर करियर अधूरा रह गया. पिता ने फैसला किया कि बेटा वैसा नहीं होगा.
जब उन्होंने 4 साल की उम्र में प्लास्टिक के बैट से एरोन को स्ट्रेट ड्राइव खेलते देखा तो लगा कि ये खास है. उनकी मां प्रीति ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एरोन जब 90 पर पहुंचते हैं तो आज भी वह सांस रोक लेती हैं. वह बताती हैं कि एरोन बचपन से ही शांत स्वभाव का है और प्रेशर में भी खुद को संयमित रखता है. परिवार ने उन्हें हर तरह का सपोर्ट दिया. ट्रेनिंग और मेंटल स्ट्रेंथ से एरोन ने खुद को मजबूत बनाया.
हैदराबाद के एक निजी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करते हुए एरोन ने अंडर एन क्रिकेट में लगातार रन बनाए. विनोद मांकड़ ट्रॉफी में एक सीजन में 341 रन और उसके अगले सीजन में 373 रन बनाकर उन्होंने खुद को साबित किया. इसके बाद विजय मर्चेंट ट्रॉफी में भी उनका बल्ला बोला. उनके इसी प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें पहले अंडर-19 एशिया कप में जगह मिली, यहां चार मैचों में उन्होंने धुआंधार 228 रन बनाए. औसत 76 से ज्यादा रहा. इसके बाद उन्हें अंडर-19 वर्ल्डकप में जगह मिली.

जब उन्होंने 4 साल की उम्र में प्लास्टिक के बैट से एरोन को स्ट्रेट ड्राइव खेलते देखा तो लगा कि ये खास है. उनकी मां प्रीति ने एक इंटरव्यू में बताया था कि एरोन जब 90 पर पहुंचते हैं तो आज भी वह सांस रोक लेती हैं. वह बताती हैं कि एरोन बचपन से ही शांत स्वभाव का है और प्रेशर में भी खुद को संयमित रखता है. परिवार ने उन्हें हर तरह का सपोर्ट दिया. ट्रेनिंग और मेंटल स्ट्रेंथ से एरोन ने खुद को मजबूत बनाया.
हैदराबाद के एक निजी पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करते हुए एरोन ने अंडर एन क्रिकेट में लगातार रन बनाए. विनोद मांकड़ ट्रॉफी में एक सीजन में 341 रन और उसके अगले सीजन में 373 रन बनाकर उन्होंने खुद को साबित किया. इसके बाद विजय मर्चेंट ट्रॉफी में भी उनका बल्ला बोला. उनके इसी प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें पहले अंडर-19 एशिया कप में जगह मिली, यहां चार मैचों में उन्होंने धुआंधार 228 रन बनाए. औसत 76 से ज्यादा रहा. इसके बाद उन्हें अंडर-19 वर्ल्डकप में जगह मिली.

एरोन को अंडर-19 वर्ल्डकप टीम में जगह मिली, जहां वह ओपनर के रूप में भारत की बल्लेबाजी की रीढ़ बने. टूर्नामेंट में एरोन ने कई महत्वपूर्ण पारियां खेलीं. खासतौर से अफगानिस्तान के खिलाफ 104 गेंदों में 115 रन की यादगार पारी ने ये साबित किया कि वह बड़े मैचों का प्रेशर भी झेलने में सक्षम हैं. मैच में उन्होंने वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ अहम साझेदारियां निभाईं, जिसकी बदौलत भारत ने 41.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया जो U19 वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ा रन चेज रहा.
एरोन की बल्लेबाजी में जल्दबाजी नहीं, सिर्फ क्लास है. एरोन की बल्लेबाजी का सबसे खूबसूरत पहलू उनकी टाइमिंग है. 19 साल की उम्र में ही Aaron ने यह दिखा दिया है कि वे बड़े मंच के खिलाड़ी हैं. अंडर-19 वनडे में 500 से ज्यादा रन और 53 के आसपास औसत इसकी बानगी है. वह पार्ट टाइम राइट आर्म मीडियम गेंदबाजी भी कर लेते हैं. क्रिकेट एक्सपर्ट मानते हैं कि अपने इसी खेल की बदौलत एरोन जल्द ही भारतीय टीम में दस्तक देंगे.
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