Mahendra Singh Dhoni News : महेंद्र सिंह धोनी ने एक इंटरव्यू में बताया कि रांची की सादगी, शांति और अपनापन उन्हें महानगरों की भागदौड़ से दूर रखता है. इसलिए उन्होंने रांची को कभी नहीं छोड़ा. यहां की जिंगदी बहुत शांति और सुकून वाली है.
कई लोगों के मन में ख्याल आता है कि इतने बड़े स्टार होने के बावजूद भी महेंद्र सिंह धोनी रांची नहीं छोड़े. इसके पीछे क्या वजह है? उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में इसके पीछे की वजह बताया. वैसे तो आपने कई बार महेंद्र सिंह धोनी को अपने रांची प्रेम का बखान करते हुए देखा होगा, लेकिन, अभी हाल ही में एक इंटरव्यू में धोनी से पूछा गया कि जब बड़े-बड़े प्लेयर स्टार बन जाते हैं. तब वह लंदन से लेकर बड़े शहरों के रुख करते हैं और वहां पर लग्जरी लाइफ जीते हैं, लेकिन आपने अभी तक रांची को ही अपना जड़ बनाए रखा. यहीं पर घर से लेकर फार्म हाउस सब कुछ बनाया और इसे नहीं छोड़ा, इसका क्या कारण है?

इस पर धोनी ने जवाब दिया की रांची में पला बढ़ा हूं. रांची के हर गली गली से वाकिफ हू. जब मैं अपने दोस्तों से बात करता हूं तो वह कहते हैं कि ऑफिस जाता हूं. सुबह में फिर वही से क्रिकेट का किट लेकर प्रेक्टिस करने चला जाता हूं. क्योंकि यहां पर ट्रैफिक ज्यादा है कि ऑफिस से घर आओ फिर स्टेडियम, जो इतना टाइम नहीं है हमारे पास, सुबह निकलता हूं और रात के 10 से 11:00 बजे घर आता हूं. मैं ऐसी लाइफ नहीं जीना चाहता था.

धोनी आगे बताते हैं कि रांची छोटा शहर है. जहां पर घर से बाहर निकालो स्टेडियम पहुंच जाओ, स्टेडियम से बाहर निकालो दोस्त के घर पहुंच जाओ और 5 मिनट में अपना घर वापस लौट आओ. फिर 2 घंटे बाद घर से कहीं और चले जाओ और फिर 1 घंटे बाद घर आ जाओ. मतलब कि आप यहां पर आसानी से 15-20 मिनट में कहीं भी जा सकते हैं. महानगर में यह चीज देखने को नहीं मिलती है.
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क्योंकि रांची छोटा शहर है और बचपन से मैं यहां रहा हूं. यहां पर क्या था कि घर से निकलते स्कूल जाता था और स्कूल के जस्ट बगल में ग्राउंड था और उसी के बगल में हॉस्पिटल भी था. मतलब की 1 किलोमीटर के दायरे में सब कुछ था तो मुझे ऐसी जिंदगी जीने की आदत है. बहुत ज्यादा भागदौड़, ट्रैफिक में फंसे रहना, यह सब उतना पसंद नहीं आता. शांति से खाली सड़क में अपने बाइक को दौड़ना पसंद है. यही कारण है मैं आज तक रांची को नहीं छोड़ा और ना मैं छोड़ूंगा.

उन्होंने दूसरे सवाल के जवाब में बोला कि पहले जब मैं नया था तो लोग पूछते थे कहां से हो तो मैं बोलता था रांची से. तो लोग बोलते थे अच्छा कराची से. मैं बोलता तो नहीं भई रांची, जहां पर मेंटल हॉस्पिटल है. हंसते हुए माही आगे बताते हैं कि अब अच्छी बात है कि हमें मेंटल हॉस्पिटल नहीं बताना पड़ता है. अब लोग समझ जाते हैं कि रांची कहां पर है तो अब रांची की पहचान बन चुकी है.

उन्होंने बताया यहां पर जब मन करता है. तब वह अपने मनपसंद गाड़ी से निकलते हैं. उतना कोई डिस्टर्ब करने वाला नहीं है.. घर से बाइक लेकर निकलता हूं स्टेडियम के लिए. यह चीज आप महानगर में सहजता से नहीं कर सकते हैं. इसीलिए जिंदगी सरल हो, आसान हो तो रांची एकदम बढ़िया है. यहां का वातावरण या व सड़कें सब कुछ अपनापन याद दिलाती हैं.
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