Last Updated:
पाकिस्तान क्रिकेट में इन दिनों एक नया ‘पैटर्न’ चर्चा का विषय बना हुआ है. सोशल मीडिया से लेकर खेल के गलियारों तक एक ही नाम गूँज रहा है मोहसिन नकवी. प्रशंसकों का मानना है कि पीसीबी चीफ मोहसिन नकवी की टीम के साथ ‘मुलाकात’ पाकिस्तान के लिए किसी ‘मनहूस’ साये से कम नहीं है.
पाकिस्तान के लिए मनहूस है मोहसिन नकवी, मैच से पहले मीटिंग और हो जाती है हार पक्की
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए पिछले कुछ साल किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं रहे हैं. कभी टीम अर्श पर होती है, तो कभी फर्श पर लेकिन इस उतार-चढ़ाव के बीच एक कड़ी जो हर हार के साथ मजबूती से जुड़ रही है, वो है पीसीबी चीफ मोहसिन नकवी की उपस्थिति. क्रिकेट प्रशंसकों के बीच यह धारणा घर कर गई है कि नकवी का खिलाड़ियों के ड्रेसिंग रूम में कदम रखना या मैच से ठीक पहले लंबी मीटिंग्स करना, टीम के मनोबल को बढ़ाने के बजाय दबाव बढ़ा देता है. क्या यह सिर्फ एक बुरा इत्तेफाक है या वाकई ‘नकवी फैक्टर’ पाकिस्तान क्रिकेट की नाक कटवा रहा है.
दुबई का वो एशिया कप फाइनल
एशिया कप के उस फाइनल को कौन भूल सकता है जहाँ पाकिस्तान की जीत लगभग तय मानी जा रही थी मैच से ठीक पहले मोहसिन नकवी ने खिलाड़ियों के साथ एक हाई-प्रोफाइल मीटिंग की और उम्मीद थी कि इससे टीम का उत्साह बढ़ेगा, लेकिन मैदान पर नतीजा इसके ठीक उलट रहा. टीम न केवल हारी, बल्कि खिलाड़ियों के बॉडी लैंग्वेज में वो आत्मविश्वास नजर नहीं आया जिसकी उम्मीद थी.
कोलंबो और वर्ल्ड कप की निराशा
इतिहास ने खुद को कोलंबो में फिर दोहराया वर्ल्ड कप के महत्वपूर्ण मैचों से पहले नकवी साहब एक बार फिर खिलाड़ियों से मिलने होटल पहुंच गए. रणनीति बनी, लंबे चौड़े दावे हुए, लेकिन मैदान पर उतरते ही पाकिस्तान की टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई. प्रशंसकों ने तुरंत इस पैटर्न को पकड़ लिया और सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई कि “नकवी की वजह से कट रही है पाकिस्तान की नाक.
क्या वाकई ‘मनहूस’ हैं नकवी?
क्रिकेट की तकनीकी भाषा में इसे ‘ओवर-मैनेजमेंट’ कहा जाता है जब बोर्ड का अध्यक्ष बार-बार ड्रेसिंग रूम में दखल देता है, तो खिलाड़ियों पर प्रदर्शन का अतिरिक्त दबाव बन जाता है. खिलाड़ियों को लगता है कि उनकी हर गलती पर सीधी नजर रखी जा रही है, जिससे वे नेचुरल गेम नहीं खेल पाते. पाकिस्तान में इसे ‘मनहूसियत’ का नाम दिया जा रहा है क्योंकि हर बड़े टूर्नामेंट में नकवी की एंट्री के साथ ही टीम का एग्जिट शुरू हो जाता है. चाहे वो टीम के चयन में हस्तक्षेप हो या मैच से पहले का अनावश्यक भाषण, नकवी की मौजूदगी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा के बजाय ‘अनलकी चार्म’ साबित हो रही है.
पाकिस्तान क्रिकेट की साख आज दांव पर है लगातार हार ने प्रशंसकों का दिल तोड़ दिया है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या पीसीबी प्रमुख को अपनी भूमिका केवल प्रशासनिक कार्यों तक ही सीमित रखनी चाहिए? बार-बार खिलाड़ियों से मिलना और हार के बाद ‘ऑपरेशन’ की धमकी देना टीम के माहौल को जहरीला बना रहा है. अगर पाकिस्तान को अपनी नाक कटने से बचानी है, तो खिलाड़ियों को मैदान पर आज़ादी देनी होगी और प्रबंधन को परदे के पीछे रहकर काम करना होगा. वरना, ‘मोहसिन नकवी और हार’ का ये अटूट रिश्ता पाकिस्तान क्रिकेट के इतिहास में एक काला अध्याय बनकर रह जाएगा.
Discover more from CRICKET NEWS
Subscribe to get the latest posts sent to your email.