Court of Arbitration of Sports: बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड की अपील को अगर आईसीसी की विवाद समाधान समिति नहीं सुनती है तो फिर वह खेल पंचाट का दरवाजा खटखटा सकता है. ऐसे में आईसीसी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. बांग्लादेश टी20 वर्ल्ड कप 2026 खेलने के लिए भारत नहीं आना चाहता है. उसने सुरक्षा का हवाला दिया है.
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने आईसीसी की विवाद समाधान समिति (डीआरसी) को पत्र लिखकर भारत में टी20 विश्व कप के मैच कराने के फैसले को बदलने की मांग की है, लेकिन यह अपील नहीं सुनी जाएगी क्योंकि यह मामला समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है. आईसीसी ने स्कॉटलैंड को स्टैंडबाय पर रखा है, लेकिन बीसीबी के पास आखिरी विकल्प के तौर पर डीआरसी ही बचा था.
इस समिति के अध्यक्ष इंग्लैंड के माइकल बेलॉफ हैं. बीसीबी के एक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई को बताया कि बीसीबी ने डीआरसी का रुख किया है क्योंकि वह अपने सारे विकल्प आजमाना चाहता है. अगर डीआरसी बीसीबी के खिलाफ फैसला देती है तो फिर सिर्फ स्विट्जरलैंड स्थित खेल पंचाट (सीएएस) ही बचता है. इससे पहले बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और खेल मंत्रालय के सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा था कि सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश की टीम भारत नहीं जाएगी. यह बयान तब आया जब मुस्तफिजुर रहमान को बीसीसीआई के निर्देश पर कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से हटा दिया गया था.
डीआरसी के अधिकार क्षेत्र को देखें तो उसके पास आईसीसी बोर्ड के किसी फैसले के खिलाफ अपील सुनने का अधिकार नहीं है. आईसीसी बोर्ड ने सुरक्षा आकलन के बाद भारी बहुमत से बांग्लादेश के मैच भारत में कराने के पक्ष में मतदान किया था. उस आकलन में सुरक्षा खतरे को कम से मध्यम बताया गया था. नजरुल का कहना था कि यह फैसला बीसीबी नहीं, सरकार को लेना है. डीआरसी के अनुच्छेद 1.3 के अनुसार, समिति आईसीसी या उसकी किसी संस्था के फैसलों के खिलाफ अपील नहीं सुन सकती. आईसीसी बोर्ड के एक सूत्र ने कहा कि बांग्लादेश डीआरसी के पास जा सकता है लेकिन नियमों के अनुसार यह मामला सुना नहीं जा सकता.
यह भी माना जा रहा है कि आईसीसी अध्यक्ष जय शाह दुबई लौट आए हैं और बांग्लादेश के विकल्प पर औपचारिक फैसला शनिवार तक आ सकता है. सूत्रों के मुताबिक आईसीसी बोर्ड के सदस्य अमीनुल इस्लाम बुलबुल से नाराज हैं क्योंकि बांग्लादेश सरकार ने आईसीसी को जानकारी देने से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी. एक सूत्र ने कहा कि आसिफ नजरुल से आईसीसी को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता लेकिन बुलबुल को बिना बताए प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करनी चाहिए थी. डीआरसी ब्रिटिश कानून के तहत काम करती है. माइकल बेलॉफ के नेतृत्व में 2018 में इसका एक चर्चित फैसला आया था जिसमें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड द्वारा बीसीसीआई के खिलाफ दायर मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया गया था. उस फैसले में डीआरसी ने कहा था कि पीसीबी का समझौता ज्ञापन सिर्फ एक आशय पत्र था, बीसीसीआई पर बाध्यकारी नहीं था.
डीआरसी का काम यह देखना है कि आईसीसी बोर्ड ने नियमों का पालन किया या नहीं. यह अपील सुनने वाली संस्था नहीं है. समिति में माइकल बेलॉफ के अलावा कई अन्य सदस्य भी हैं.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
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