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6 जून से होने वाले भारत बनाम अफ़ग़ानिस्तान का यह एकमात्र टेस्ट भले ही बड़े टूर्नामेंटों की चमक के बीच दबा हुआ लगे, पर इसके नतीजे दूरगामी हो सकते हैं. बुमराह को आराम देना, सिराज को जिम्मेदारी सौंपना और आक़िब नबी जैसे उभरते नाम को आज़माना ये फैसले भारतीय टेस्ट टीम की दिशा तय कर सकते हैं.
आकिब नबी का टेस्ट डेब्यू पक्का, जून में मिल सकती है टीम इंडिया की कैप
भारत बनाम अफ़ग़ानिस्तान का यह एकमात्र टेस्ट भले ही बड़े टूर्नामेंटों की चमक के बीच दबा हुआ लगे, पर इसके नतीजे दूरगामी हो सकते हैं. बुमराह को आराम देना, सिराज को जिम्मेदारी सौंपना और आक़िब नबी जैसे उभरते नाम को आज़माना ये फैसले भारतीय टेस्ट टीम की दिशा तय कर सकते हैं. कभी-कभी छोटे दिखने वाले मैच ही भविष्य की बड़ी कहानियों की नींव रखते हैं. न्यू चंडीगढ़ में ऐसा ही एक अध्याय लिखा जा सकता है.
बुमराह को आराम देने का सही समय
लगातार चार महीने की व्यस्त क्रिकेट के बाद जसप्रीत बुमराह को आराम देना समझदारी भरा कदम होगा. 2025 में वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उन्हें आराम नहीं दिया गया था, लेकिन इस बार परिस्थितियाँ अलग हैं. भारत को अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ अपनी पूरी ताकत झोंकने की जरूरत नहीं. मोहम्मद सिराज तेज़ आक्रमण की अगुवाई कर सकते हैं. उनके साथ एक और तेज़ गेंदबाज़ को मौका दिया जा सकता है. विकल्पों की कमी नहीं है प्रसिद्ध कृष्णा, आकाश दीप और चोट से उबर रहे हर्षित राणा रडार पर हैं. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पिछली टेस्ट सीरीज़ में प्रसिद्ध टीम का हिस्सा नहीं थे, जबकि आकाश दीप चुने गए लेकिन उन्हें खेलने का अवसर नहीं मिला.
क्या अब आक़िब नबी की बारी?
इन तीन नामों के अलावा एक चौथा विकल्प भी है, जो लगातार दरवाज़ा खटखटा रहा है जम्मू-कश्मीर के तेज़ गेंदबाज़ आक़िब नबी. रणजी ट्रॉफी 2025-26 के विजेता और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे नबी ने 10 मैचों में 60 विकेट झटके, जिसमें फाइनल में कर्नाटक के खिलाफ पांच विकेट भी शामिल थे.सिर्फ़ यही नहीं, 2024-25 सीज़न में भी उन्होंने 8 मैचों में 44 विकेट लिए थे. इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने उन्हें दलीप ट्रॉफी या इंडिया ए टीम में मौका नहीं दिया. न्यू चंडीगढ़ का यह एकमात्र टेस्ट उनके लिए आदर्श मंच हो सकता है. कुछ आलोचकों का मानना था कि उनकी रफ्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए पर्याप्त नहीं. लेकिन हुबली में उन्होंने केएल राहुल और करुण नायर जैसे बल्लेबाज़ों को आउट कर यह धारणा तोड़ी. सपाट पिच पर भी उन्होंने गेंद से बात करवाई.
आगे की तैयारी: न्यूज़ीलैंड दौरा नजर में
अक्टूबर-नवंबर में भारत का न्यूज़ीलैंड दौरा प्रस्तावित है. विदेशी परिस्थितियों में तेज़ गेंदबाज़ी की अहमियत और बढ़ जाती है. इंग्लैंड दौरे पर हमने देखा कि आकाश दीप और बुमराह चोटों से जूझते रहे, जबकि अंशुल कंबोज भी पूरी तरह फिट नहीं थे. भले ही न्यूज़ीलैंड में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ नहीं हो, लेकिन विकल्पों की गहराई जरूरी है. ऐसे में अफ़ग़ानिस्तान के खिलाफ टेस्ट प्रयोगशाला साबित हो सकता है.
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