New Zealand Jersey Number 69 banned: भारत दौरे पर आई न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड उन चुनिंदा बोर्डों में शामिल है, जिसने जर्सी नंबर 69 पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया हुआ है. इसका सबसे चर्चित उदाहरण तेज़ गेंदबाज़ लॉकी फर्ग्यूसन हैं. फर्ग्यूसन अपने घरेलू क्रिकेट करियर में नंबर 69 की जर्सी पहनते थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में न्यूजीलैंड के लिए डेब्यू किया, बोर्ड ने उन्हें यह नंबर बदलने के लिए कह दिया.
तकनीकी रूप से देखा जाए तो क्रिकेट में नंबर 69 पूरी तरह वैध है. ICC के नियमों में कहीं भी इस नंबर पर बैन का जिक्र नहीं मिलता. खिलाड़ी आमतौर पर 1 से 99 के बीच कोई भी जर्सी नंबर चुन सकते हैं, बशर्ते वह नंबर टीम में पहले से किसी अन्य सक्रिय खिलाड़ी के पास न हो. लेकिन विवाद की जड़ इस नंबर के दोहरे अर्थ और यौन संदर्भ माने जाते हैं. यही वजह है कि कुछ नेशनल क्रिकेट बोर्ड इस नंबर को अनुचित मानते हैं और इसे अपनी टीमों में उपयोग की अनुमति नहीं देते.
नंबर 69 पर न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड का सख्त रुख
भारत दौरे पर आई न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड उन चुनिंदा बोर्डों में शामिल है, जिसने जर्सी नंबर 69 पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध लगाया हुआ है. इसका सबसे चर्चित उदाहरण तेज़ गेंदबाज़ लॉकी फर्ग्यूसन हैं. फर्ग्यूसन अपने घरेलू क्रिकेट करियर में नंबर 69 की जर्सी पहनते थे, लेकिन जैसे ही उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में न्यूजीलैंड के लिए डेब्यू किया, बोर्ड ने उन्हें यह नंबर बदलने के लिए कह दिया. NZC ने साफ किया कि 1 से 99 के बीच 69 ही एकमात्र ऐसा नंबर है, जिसे उसके यौन संदर्भों के चलते प्रतिबंधित किया गया है. न्यूजीलैंड के अलावा किसी अन्य क्रिकेट बोर्ड ने सार्वजनिक रूप से नंबर 69 पर आधिकारिक बैन की पुष्टि नहीं की है हालांकि, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी यह नंबर शायद ही कभी खिलाड़ियों की जर्सी पर देखने को मिलता है. माना जाता है कि खिलाड़ी खुद ही विवाद से बचने के लिए इस नंबर को चुनने से परहेज़ करते हैं.
भारत में नंबर 69 को लेकर कोई विवाद नहीं
भारतीय क्रिकेट में नंबर 69 को लेकर कोई प्रतिबंध या विवाद नहीं है. भारतीय खिलाड़ी करुण नायर वर्तमान में इस जर्सी नंबर का इस्तेमाल कर चुके हैं. भारत में जर्सी नंबर को व्यक्तिगत पसंद और उपलब्धता से जोड़कर देखा जाता है, न कि उसके कथित अर्थों से. कुल मिलाकर, क्रिकेट में नंबर 69 पर कोई इंटरनेशनल बैन नहीं है, लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं के कारण कुछ देशों में यह नंबर अब भी असहजता का कारण बना हुआ है. जर्सी नंबर भले ही खिलाड़ी की पहचान हो, लेकिन कभी-कभी वही पहचान विवाद की वजह भी बन जाती है.
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