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IND Vs PAK: आईसीसी के 15 डिग्री नियम के तहत बॉल को थ्रो की तरह फेंकना गलत है. आईसीसी के कानून 21.2 में क्या है और क्यों भारतीय अंपायर ने इस एक्शन को सही बताया, समझिए.
उस्मान तारिक के बॉलिंग एक्शन पर सवाल उठ रहे हैं.
यह वाकया था क्वेटा ग्लेडियम Vs कराची किंग्स के मैच के दौरान का. शिकायत हुई थी मैच रैफरी रोशन महामना से और जांच की थी, लाहौर की नेशनल क्रिकेट एकेडमी ने, जिसे खुद पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड ने कराया था. हालांकि उस्मान के एक्शन पर जो सवाल थे, वो खत्म नहीं हुए और अगले सीजन में एक बार फिर अंपायर अहसान रजा और क्रिस ब्राउन ने क्वेटा और लाहौर कलंदर के बीच हुए मैच में सवाल उठाया.
अंपायरों का कहना था कि उनका बेसबॉल स्टाइल स्लिंगिंग एक्शन है, डिलीवरी से पहले वह 1 से 2 सेकेंड रुकते हैं और उनके एल्बो में बैंड है, जो विजुअली समझ में आता है. एक बार फिर जांच में एक्शन सही पाया गया उस्मान पीएसएल खेलते रहे. नवंबर में साउथ अफ्रीका के खिलाफ उस्मान का डेब्यू हुआ मगर सवाल उठने बंद नहीं हुए.
सोशल मीडिया पर यह कहा जाता रहा कि उस्मान पत्थर बॉल फेंक रहे हैं, जिसे चकिंग भी कहते हैं. पाकिस्तान ऑर ऑस्ट्रेलिया के बीच जब टी-20 सीरीज खेली गई तो एक बार फिर उस्मान का एक्शन विवादों में आया और इस बार सवाल उठाया कैमरुन ग्रीन ने. दूसरे टी-20 मैच में जब ग्रीन आउट हुए तो वह डगआउट तक जाते जाते अपने जेस्चर से तारिक के एक्शन पर सवाल उठाए गए.
टी-20 वर्ल्डकप में तारिक ने यूएसए के खिलाफ 4 विकेट लिए तो एक बार फिर इस विवाद को हवा मिल गई. हालांकि आईसीसी का 15 डिग्री नियम अभी भी तारिक की ढाल बना हुआ है. इसके अलावा भारत के दिग्गज क्रिकेटर रहे रविचंद्रन आश्विन ने भी तारिक का साथ दिया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने इसे गलत बताया है.
आईसीसी के 15 डिग्री नियम के तहत बॉल को थ्रो की तरह फेंकना गलत है. आईसीसी के कानून 21.2 के तहत जब बॉलर गेंद फेके तो उसकी कोहली 15 डिग्री से ज्यादा मुड़ी नहीं होनी चाहिए. अगर ये 15 डिग्री से ज्यादा है तो एक्शन को गलत माना जाता है. अगर कोहली में नेचुरल हाइपरएक्सटेंशन यानी पीछे की तरफ ज्यादा झुकाव है तो उसे गलत नहीं माना जाता.
अगर मैच में अंपायर को लगता है कि एक्शन संदिग्ध है तो वह अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र करता है. जांच आईसीसी द्वारा अप्रूव्ड लैब में होती है, ये ज्यादातर देशों की राष्ट्रीय क्रिकेट एकेडमी ही होती हैं. यहां हाई-स्पीड कैमरा और बायोमैकेनिकल एनालिसिस से डिग्री मापी जाती है.
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सोशल मीडिया पर यह कहा जाता रहा कि उस्मान पत्थर बॉल फेंक रहे हैं, जिसे चकिंग भी कहते हैं. पाकिस्तान ऑर ऑस्ट्रेलिया के बीच जब टी-20 सीरीज खेली गई तो एक बार फिर उस्मान का एक्शन विवादों में आया और इस बार सवाल उठाया कैमरुन ग्रीन ने. दूसरे टी-20 मैच में जब ग्रीन आउट हुए तो वह डगआउट तक जाते जाते अपने जेस्चर से तारिक के एक्शन पर सवाल उठाए गए.
टी-20 वर्ल्डकप में तारिक ने यूएसए के खिलाफ 4 विकेट लिए तो एक बार फिर इस विवाद को हवा मिल गई. हालांकि आईसीसी का 15 डिग्री नियम अभी भी तारिक की ढाल बना हुआ है. इसके अलावा भारत के दिग्गज क्रिकेटर रहे रविचंद्रन आश्विन ने भी तारिक का साथ दिया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा ने इसे गलत बताया है.
आईसीसी के 15 डिग्री नियम के तहत बॉल को थ्रो की तरह फेंकना गलत है. आईसीसी के कानून 21.2 के तहत जब बॉलर गेंद फेके तो उसकी कोहली 15 डिग्री से ज्यादा मुड़ी नहीं होनी चाहिए. अगर ये 15 डिग्री से ज्यादा है तो एक्शन को गलत माना जाता है. अगर कोहली में नेचुरल हाइपरएक्सटेंशन यानी पीछे की तरफ ज्यादा झुकाव है तो उसे गलत नहीं माना जाता.
अगर मैच में अंपायर को लगता है कि एक्शन संदिग्ध है तो वह अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र करता है. जांच आईसीसी द्वारा अप्रूव्ड लैब में होती है, ये ज्यादातर देशों की राष्ट्रीय क्रिकेट एकेडमी ही होती हैं. यहां हाई-स्पीड कैमरा और बायोमैकेनिकल एनालिसिस से डिग्री मापी जाती है.
आईसीसी चकिंग को अपराध इसलिए मानता है, क्योंकि ये स्टा्इकर बैट्समैन को चौंकाने वाला माना जाता है. आईसीसी के रूल 41.2 के तहत तारिक के एक्शन पर जो सवाल उठे हैं वह इस रूल के तहत नहीं आता. इसके तहत अंपायर हर उस बॉल को डेड घोषित कर सकते हैं, जो उन्हें गलत लग रही हो. अगर फील्डर भी कभी स्ट्राइकर बैट्समैन का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ भी इसी रूल के तहत कार्रवाई होती है. अंपायर न सिर्फ डेड बॉल डिक्लियर करते हैं, बल्कि पेनाल्टी भी लगा सकते हैं, या वार्निंग दे सकते हैं.
पूर्व आईसीसी अंपायर अनिल चौधरी ने इंस्टाग्राम वीडियो में तारिक के एक्शन को क्लियर बताया है. उन्होंने वीडियो देखकर कहा कि एक्शन थोड़ा साइड-ऑन और पॉज वाला है, लेकिन अलग लगने के बावजूद सारी गेंदें एक ही तरीके से डाली जाती हैं. एल्बो में कोई बेंडिंग/स्ट्रेटनिंग नहीं दिखती जो ICC के 15° लिमिट से ज्यादा हो. उन्होंने कहा कि एक्शन अलग है, लेकिन गाइडलाइंस के हिसाब से बिल्कुल फाइन है.
अश्विन ने सोशल मीडिया पर उस्मान तारिक का खुलकर बचाव किया था. उन्होंने कहा कि तारिक के एक्शन पर ऑनफील्ड जजमेंट नहीं लिया जा सकता. किसी कंफ्यूजन का फायदा उठाकर किसी पर आरोप गलत है. तारिक का पॉज वाला हिस्सा पूरी तरह लीगल है, ये रेगुलर और नैचुरल एक्शन है.
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