समस्तीपुर की धरती एक बार फिर यह साबित कर चुकी है कि यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. अंतर बस दौर का है, जुनून और मेहनत वही है. साल 2026 में ताजपुर निवासी संजीव सूर्यवंशी के पुत्र वैभव सूर्यवंशी ने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से भारत को विश्व विजेता बनाकर पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा.
वैभव का यह प्रदर्शन अचानक नहीं था, बल्कि उसी परंपरा की कड़ी है, जिसकी नींव साल 2018 में रोसड़ा के भीड़हा गांव निवासी अनुकूल राय ने रखी थी. सबसे खास बात यह रही कि 2018 में गेंदबाजी से तहलका मचाने वाले अनुकूल राय और 2026 में बल्लेबाजी से दुनिया को चौंकाने वाले वैभव सूर्यवंशी, दोनों एक ही गुरु, समस्तीपुर के बृजेश झा के शिष्य हैं.
2018 की यादें..अनुकूल राय की गेंदों ने बदला इतिहास
साल 2018 समस्तीपुर के लिए ऐतिहासिक रहा था, जब रोसड़ा निवासी अनुकूल राय ने अपनी धारदार गेंदबाजी से भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. पूरी प्रतियोगिता में सर्वाधिक 14 विकेट लेकर उन्होंने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज का खिताब अपने नाम किया था. अनुकूल की गेंदों में वह धार थी, जो बड़े मुकाबलों में मैच का रुख पलट देती है. उनकी सटीक लाइन-लेंथ, स्विंग और मानसिक मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. अनुकूल राय की यह सफलता सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं थी, बल्कि यह उस समस्तीपुर की जीत थी, जहां सीमित संसाधनों के बीच सपने बड़े देखे जाते हैं. उसी जीत ने आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों, खासकर वैभव सूर्यवंशी जैसे युवाओं के लिए राह दिखाई.
वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी ने रचा नया अध्याय
साल 2026 में वैभव सूर्यवंशी ने उसी विरासत को आगे बढ़ाया, लेकिन इस बार हथियार था बल्ला. पूरे टूर्नामेंट में 439 रन बनाकर उन्होंने विपक्षी टीमों के गेंदबाजों की रणनीति ध्वस्त कर दी. बड़े मैचों में निडर होकर खेलने की उनकी शैली ने क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित किया और भारत को विश्व विजेता बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई. अनुकूल राय की बहन मीनाक्षी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि अनुकूल बचपन से ही खेल में रुचि रखते थे और पढ़ाई से ज्यादा क्रिकेट को समय देते थे. स्वभाव से सरल अनुकूल आज भी परिवार से जुड़े हुए हैं. यही संस्कार और यही मेहनत, गुरु बृजेश झा के मार्गदर्शन में, अनुकूल से वैभव तक पहुंची. 2018 में अनुकूल राय और 2026 में वैभव सूर्यवंशी, दोनों ने यह साबित कर दिया कि जब गुरु एक हो, साधना सच्ची हो और मिट्टी समस्तीपुर की हो, तो विश्व क्रिकेट में परचम लहराना तय है.
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