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जिम्बाब्वे ने ग्रुप-B के अंतिम लीग मुकाबले में श्रीलंका को हराकर एक फिर साबित कर दिया कि ऑस्ट्रेलिया पर उनकी जीत कोई तुक्का नहीं थी. यह टीम अब अपने ग्रुप B की टॉप टीम बनकर सुपर-8 में पहुंची है.
सिकंदर रजा ने जिम्बाब्वे क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया है.
जिम्बाब्वे ने ग्रुप-B के अंतिम लीग मुकाबले में श्रीलंका को हराकर एक फिर साबित कर दिया कि ऑस्ट्रेलिया पर उनकी जीत कोई तुक्का नहीं थी. यह टीम अब अपने ग्रुप B की टॉप टीम बनकर सुपर-8 में पहुंची है, जहां उसका मुकाबला साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और भारत से होने वाला है. इस वर्ल्डकप में अब तक जिम्बाब्वे ने जिस तरह का खेल दिखाया है, उससे ये साफ हो चुका है कि सुपर-8 में साथी टीमों के लिए उससे पार पाना आसान न होगा.
ये वही टीम है जो आखिरी बार किसी वर्ल्डकप के सुपर सिक्स में 2003 में पहुंची थी, उसके बाद सिर्फ 2022 में टीम सुपर-12 तक पहुंची. 2024 में क्वालीफाई भी नहीं कर पाई और अब ऐसा प्रदर्शन कर रही है जिसके बारे में शायद ही किसी ने सोचा हो. टीम के हौसले कितने बुलंद थे इसका अंदाजा सहायक कोच डियोन इब्राहिम के बयान से लगाया जा सकता है, जिनका कहना था कि ग्रुप में सभी चार में से चार मैचों में जीतने से सिर्फ बारिश रोक पाई, जिससे आयरलैंड के साथ मैच नहीं हो पाया था.
जिम्बाब्वे के इस करिश्मे के पीछे एक शख्स जिसका सबसे ज्यादा हाथ माना जा रहा है, वह हैं सिकंदर रजा. सिकंदर को जब टीम की कमान दी गई तो बोर्ड फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स से जूझ रहा था. टीम लगातार हार रही थी. ऐसे में सिकंदर टीम की ऐसी रीढ़ बने जिन्होंने अपने ऑलराउंडर प्रदर्शन से टीम को लड़ना सिखाया.
2023 से 2024 तक दो साल में सिकंदर ने गेंद से 70 विकेट लिए और सैकड़ों रन बनाए. इस बीच सिकंदर को आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर जैसे अवॉर्ड के लिए भी नॉमिनेट हुए. उन्हें दुनिया के व्हाइट बॉल् प्लेयर्स की लिस्ट में जगह भी मिली. सिकंदर ने टीम को अनुशासित बनाया और ये विश्वास दिलाया कि अगर लड़ेंगे तो जीत भी हासिल करेंगे. उन्होंने टीम को वॉरियर मेंटेलिटी दी और जिम्बाब्वे क्रिकेट के पोस्टर बॉय बन गए.
सिकंदर एक वैश्विक सुपरस्टार हैं, वे महान खिलाड़ियों में शामिल हैं. जिम्बाब्वे अब सुपर एट के लिए भारत जा रहा है, यह एक ऐसा मंच है जिस पर पहुंचने के लिए टीम का हर खिलाड़ी बेताब था.
डियोजन इब्राहिम, सहायक कोच, जिम्बाब्वे
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जिम्बाब्वे के इस करिश्मे के पीछे एक शख्स जिसका सबसे ज्यादा हाथ माना जा रहा है, वह हैं सिकंदर रजा. सिकंदर को जब टीम की कमान दी गई तो बोर्ड फाइनेंशियल प्रॉब्लम्स से जूझ रहा था. टीम लगातार हार रही थी. ऐसे में सिकंदर टीम की ऐसी रीढ़ बने जिन्होंने अपने ऑलराउंडर प्रदर्शन से टीम को लड़ना सिखाया.
2023 से 2024 तक दो साल में सिकंदर ने गेंद से 70 विकेट लिए और सैकड़ों रन बनाए. इस बीच सिकंदर को आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर जैसे अवॉर्ड के लिए भी नॉमिनेट हुए. उन्हें दुनिया के व्हाइट बॉल् प्लेयर्स की लिस्ट में जगह भी मिली. सिकंदर ने टीम को अनुशासित बनाया और ये विश्वास दिलाया कि अगर लड़ेंगे तो जीत भी हासिल करेंगे. उन्होंने टीम को वॉरियर मेंटेलिटी दी और जिम्बाब्वे क्रिकेट के पोस्टर बॉय बन गए.
सिकंदर एक वैश्विक सुपरस्टार हैं, वे महान खिलाड़ियों में शामिल हैं. जिम्बाब्वे अब सुपर एट के लिए भारत जा रहा है, यह एक ऐसा मंच है जिस पर पहुंचने के लिए टीम का हर खिलाड़ी बेताब था.
डियोजन इब्राहिम, सहायक कोच, जिम्बाब्वे

टीम का लड़खड़ाना और फिर खड़ा होना इतना आसान न था. 2024 में क्वालीफाई न कर पाना टीम का दिल तोड़ने वाला था. टीम ने लगातार 18 महीने मेहनत की. कप्तान सिकंदर रजा ने टीम को लड़ना सिखाया. जब इस वर्ल्डकप का क्वालीफायर केन्या सब रीजन में खेला गया तो जिम्बाब्वे ने रवांडा और तंजानिया की टीमों के खिलाफ जीत का ऐसा करिश्मा शुरू किया जो 13-0 पर रुका. सहायक कोच इब्राहिम के मुताबिक क्वालिफायर से पहले हमें लगातार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसी टीमों से हार मिली. हमने इनसे सीखा और सुधार पर फोकस किया और परिणाम सबके सामने है.
जिम्बाब्वे की ओर से बाईस साल के ब्रायन बेनेट ने टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है. वे अब तीन मैचों में 48, 64 और 63 रन की पारियां खेल चुके हैं. खास बात यह है कि वह इन मैचों में एक बार भी आउट नहीं हुए. गेंदबाजी में मुजारबानी टूर्नामेंट के सुपर-8 में पहुंची टीमों में हाईएस्ट विकेट टेकर गेंदबाज है, जो भारत के वरुण चक्रवर्ती के साथ संयुक्त तौर पर काबिज हैं.
यह शो टाइम है, हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे, जो होगा वो देखा जाएगा
– सिकंदर रजा, कप्तान जिम्बाब्वे क्रिकेट टीम
ऑस्ट्रेलिया को हराने के बाद कप्तान सिकंदर रजा टीम के प्रदर्शन से बहुत गदगद हैं.
सिकंदर रजा का जन्म 24 अप्रैल 1986 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ. बचपन में वे फाइटर पायलट बनना चाहते थे और पाकिस्तानी एयर फोर्स में अप्लाई भी किया, लेकिन आंखों की समस्या के कारण यह सपना टूट गया. इसके बाद वे सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए स्कॉटलैंड के ग्लासगो कैलेडोनियन यूनिवर्सिटी चले गए. वहां उन्होंने क्लब क्रिकेट खेलना शुरू किया पहले वे फास्ट बॉलर थे, लेकिन बाद में ऑलराउंडर बने. 2002 में उनका परिवार जिम्बाब्वे शिफ्ट हो गया था. पढ़ाई पूरी करने के बाद यहीं घरेलू क्रिकेट में उतरे और टीम में जगह बनाई. उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 2013 में डेब्यू किया था.
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