manoj twari on virat retirement: वनडे सबसे आसान फॉर्मेट है ये कहना पूरी कहना पूरी तरह से गलत है.मनोज तिवारी ने कहा कि मेरे हिसाब से विराट कोहली को टेस्ट क्रिकेट छोड़ने के लिए मजबूर किया गया. एक ऐसा माहौल बनाया गया कि उनके पास संन्यास लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. वह ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जो रेड बॉल क्रिकेट से खुद हार मान लें.
इसके बावजूद टीम मैनेजमेंट ने विराट कोहली पर भरोसा बनाए रखा. खासतौर पर रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ की कप्तान-कोच जोड़ी का उन्हें पूरा समर्थन मिला लेकिन इस जोड़ी के टूटने के महज़ छह महीने के भीतर ही विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान कर दिया. इसके बाद भारत को एक और बड़ा झटका लगा, जब टीम को घर में ही दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज़ में व्हाइटवॉश झेलना पड़ा.
वनडे में रन बनाना क्या सचमुच आसान है
हाल ही में पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ संजय मांजरेकर ने विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने पर निराशा जताई थी. मांजरेकर का कहना था कि जब उनके ‘फैब फोर’ प्रतिद्वंद्वी जो रूट, स्टीव स्मिथ और केन विलियमसन अब भी टेस्ट क्रिकेट में शतक पर शतक जड़ रहे हैं और उनसे आगे निकल चुके हैं, तब कोहली का इस फॉर्मेट को छोड़ना दुखद है. मांजरेकर ने कहा कि अगर कोहली ने पूरी तरह क्रिकेट से संन्यास लिया होता तो वह बात समझ में आती, लेकिन सिर्फ टेस्ट छोड़कर वनडे खेलते रहने का फैसला उन्हें ज्यादा निराश करता है.
इसके बाद पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ मनोज तिवारी से पूछा गया कि क्या वह मांजरेकर की इस बात से सहमत हैं कि वनडे क्रिकेट सबसे आसान फॉर्मेट है इस पर मनोज तिवारी ने साफ तौर पर असहमति जताई. मनोज तिवारी का मानना है कि विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट अपनी मर्जी से नहीं छोड़ा. उनके अनुसार, ऐसा माहौल बनाया गया जिसमें कोहली के पास संन्यास लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.
मजबूरी में विराट ने छोड़ा टेस्ट
मनोज तिवारी ने कहा कि रिपोर्ट्स में यह बात सामने आई थी कि इंग्लैंड दौरे के बीच में ही विराट कोहली को टीम से बाहर किया जा सकता था, ठीक उसी तरह जैसे ऑस्ट्रेलिया दौरे में रोहित शर्मा के साथ हुआ था. कोहली ऐसा नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने अपने तरीके से फैसला लिया. मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं कि वनडे सबसे आसान फॉर्मेट है. मेरे हिसाब से विराट कोहली को टेस्ट क्रिकेट छोड़ने के लिए मजबूर किया गया. एक ऐसा माहौल बनाया गया कि उनके पास संन्यास लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. वह ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जो रेड बॉल क्रिकेट से खुद हार मान लें.
फैसला भले ही उन्होंने लिया हो,लेकिन पर्दे के पीछे क्या हुआ, यह सब जानते हैं.जब ये सब जानने के बाद भी आप कहें कि उन्होंने सबसे कठिन फॉर्मेट छोड़कर सिर्फ रन बनाने के लिए सबसे आसान फॉर्मेट चुना तो मैं इस बात से बिल्कुल सहमत नहीं हूं.
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