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dropping catch isue for team india: नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच में 4 कैच छूटना इस कमजोरी को और उजागर कर गया. असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने भी इस मुद्दे को स्वीकार किया और साफ कहा कि टीम इस पर लगातार काम कर रही है, लेकिन इसे बड़ा मुद्दा बनाकर खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालना चाहती.
ग्रुप स्टेज के मैचों में भारतीय टीम ने 9 कैच टपकाए, फील्डिंग को लेकर गंभीर ने लगाई क्लास
नीदरलैंड्स के खिलाफ मैच में 4 कैच छूटना इस कमजोरी को और उजागर कर गया. असिस्टेंट कोच रयान टेन डोशेट ने भी इस मुद्दे को स्वीकार किया और साफ कहा कि टीम इस पर लगातार काम कर रही है, लेकिन इसे बड़ा मुद्दा बनाकर खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालना चाहती. टी20 क्रिकेट में एक कैच मैच का रुख बदल देता है, और सुपर 8 जैसे हाई-प्रेशर स्टेज में तो यह अंतर और भी बड़ा हो जाता है.
औसतन 10 चांस में 3 छोड़ रही है टीम इंडिया
वर्ल्ड कप में भारतीय फील्डिंग के आंकड़ों पर नज़र डालें तो भारत ने अब तक 20 कैच जरूर पकड़े हैं, लेकिन कैचिंग एफिशिएंसी सिर्फ 68.97% रही है. आसान भाषा में कहें तो गेंदबाज़ हर 10 मौकों में से लगभग 3 मौके फील्डरों की गलतियों की वजह से गंवा रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी आयरलैंड ने सबसे ज्यादा 10 कैच ड्रॉप किए हैं, लेकिन भारत उससे बस एक कदम पीछे है जो बताता है कि यह समस्या छोटी नहीं है. ड्रॉप कैच की लिस्ट भी चिंता बढ़ाने वाली है. तिलक वर्मा ने सबसे ज्यादा 3 कैच छोड़े हैं नीदरलैंड्स, पाकिस्तान और USA के खिलाफ. इसके अलावा कुलदीप यादव, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव, रिंकू सिंह और शिवम दुबे ने भी अहम मौके गंवाए हैं, ज्यादातर नीदरलैंड्स मैच में जो यह दर्शाता है कि समस्या किसी एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं, बल्कि सामूहिक है.
दो दिन में दूर करनी है समस्या
हालांकि राहत की बात यह है कि टीम मैनेजमेंट स्थिति से पूरी तरह अवगत है और प्रैक्टिस सेशन में हाई-कैच और प्रेशर फील्डिंग ड्रिल्स पर खास फोकस किया जा रहा है. भारत की बल्लेबाज़ी लाइन-अप और गेंदबाज़ी यूनिट अभी भी टूर्नामेंट की सबसे मजबूत मानी जा रही है, लेकिन अगर फील्डिंग में सुधार नहीं हुआ, तो सुपर 8 में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका जैसी बेहतरीन फील्डिंग टीमों के खिलाफ यह कमजोरी भारी पड़ सकती है. सच यही है कि चैंपियन टीम सिर्फ रन और विकेट से नहीं बनती, बल्कि उन आधे मौकों से बनती है जो कैच में बदलते हैं अगर भारत को खिताब बचाना है, तो सुपर 8 से पहले “हाफ-चांस” को “फुल-चांस” में बदलना ही असली गेम-चेंजर साबित होगा.
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