Ajit Agarkar fastest ODI fifty record: बीसीसीआई के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर का नाम क्रिकेट के उन सुनहरे पन्नों में दर्ज है जहां उन्होंने अपनी गेंदबाजी से ज्यादा अपनी बल्लेबाजी से दुनिया को हैरान कर दिया. 14 दिसंबर, 2000 को राजकोट के माधवराव सिंधिया क्रिकेट ग्राउंड पर जो हुआ, उसने भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया जिसे 25 साल बीत जाने के बाद भी सचिन, सहवाग, युवराज या कोहली जैसे दिग्गज नहीं तोड़ पाए.
साल 2000 में जिम्बाब्वे की टीम भारत दौरे पर थी. सीरीज का पांचवां और आखिरी वनडे राजकोट में खेला जा रहा था. कप्तान सौरव गांगुली उस मैच में नहीं खेल रहे थे और कमान राहुल द्रविड़ के हाथों में थी. भारत ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी शुरू की, लेकिन टीम की शुरुआत बेहद खराब रही. सचिन तेंदुलकर (27) और राहुल द्रविड़ (6) जल्दी पवेलियन लौट गए. युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग भी कुछ खास नहीं कर सके. हेमांग बदानी (77) एक छोर संभाल कर खड़े थे, लेकिन भारत का स्कोर 44वें ओवर तक 6 विकेट पर 216 रन था. लग रहा था कि टीम 250-260 तक ही पहुंच पाएगी. तभी आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) . उन्होंने क्रीज पर आते ही अपने इरादे साफ कर दिए. उन्होंने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों, खासकर ब्रायन स्ट्रैंग और म्लुलेकी नकाला पर हमला बोल दिया. उनकी बल्लेबाजी में आज के टी20 युग वाली आक्रामकता थी. उन्होंने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाए.

अजीत अगरकर ने आठवें नंबर पर उतरकर बल्लेबाजी में बनाया था बड़ा रिकॉर्ड.
21 गेंदों पर पूरी की हाफ सेंचुरी
अजीत अगरकर ने मात्र 21 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया. इसी के साथ उन्होंने महान कपिल देव का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने 1983 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 22 गेंदों में अर्धशतक बनाया था. अगरकर ने कुल 25 गेंदें खेलीं और नाबाद 67 रन बनाए. इस छोटी लेकिन विध्वंसक पारी में उन्होंने 7 चौके और 4 गगनचुंबी छक्के जड़े. उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने 50 ओवरों में 301 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया.

अगरकर ने बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी में भी दिखाया दम
अजीत अगरकर उस दिन सिर्फ बल्ले से ही नहीं चमके, बल्कि उन्होंने अपनी मुख्य भूमिका (गेंदबाजी) में भी शानदार प्रदर्शन किया. उन्होंने जिम्बाब्वे के 3 अहम विकेट चटकाए. भारत ने यह मैच 39 रनों से जीता और अगरकर को उनके इस ‘ऑलराउंड’ प्रदर्शन के लिए ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया.
आज भी अटूट है अगरकर का रिकॉर्ड
पिछले दो दशकों में भारतीय क्रिकेट ने कई बड़े हिटर देखे. राहुल द्रविड़ ने 22 गेंदों में (2003), युवराज सिंह ने 22 गेंदों में (2004) और वीरेंद्र सहवाग ने भी 22 गेंदों में (2001) अर्धशतक जड़े, लेकिन कोई भी अगरकर के 21 गेंदों के जादुई आंकड़े को पार नहीं कर सका. राजकोट की वह पारी आज भी गवाह है कि अगरकर केवल एक विकेट लेने वाले गेंदबाज नहीं, बल्कि एक ‘मैच विनर’ बल्लेबाज भी थे.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
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