Why Virender Sehwag play with numberless jersey:भारतीय टीम के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने 2011 वर्ल्ड कप में बिना नंबर की जर्सी के पूरा टूर्नामेंट खेला था. इसके पीछे की वजह उनकी मां और पत्नी आरती की अलग अलग नंबर की पसंद थी. कोई एक नाराज ना हो जाए इसी वजह से उन्होंने बिना नंबर के ही खेलने का फैसला लिया था.
सहवाग ने एक बार अपने फैन के किए गए सवाल का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर सबके साथ इस मजेदार किस्से को साझा किया था. भारत के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने खुलासा किया कि अपने करियर की शुरुआत में उन्हें 44 नंबर की जर्सी दी गई थी, जो पहले सैराज बहुतुले की थी. दरअसर जिस सीरीज में उनका चयन हुआ उसमें बहुतुले का चुना जाना लगभग तय था इसी वजह से जर्सी उनके नंबर की बनाई गई थी. जब सहवाग की जगह टीम में बनी तो उन्होंने बहुतुले का नाम टेप से ढक दिया और उसी जर्सी में खेलना शुरू किया. बाद में उनकी मां ने ज्योतिषी से सलाह लेने के बाद उन्हें 46 नंबर की जर्सी पहनने की सलाह दी. इसके बाद लंबे समय तक सहवाग इसी नंबर के साथ खेलने उतरे.

अप्रैल 2004 में टीम इंडिया के विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग की शादी आरती के साथ हुई. यहां से जर्सी के नंबर को लेकर असली खेल शुरू हुआ. सहवाग की पत्नी आरती ज्योतिष और अंकशास्त्र में रुचि रखती हैं, उन्होंने पति को बताया गया कि 46 नंबर उनके लिए ठीक नहीं है और उन्हें 2 नंबर की जर्सी पहननी चाहिए.
साल 2011 वर्ल्ड कप से पहले वो मां और बीवी के इस नंबर के खेल में फंस गए. कभी 46 तो कभी 2 नंबर की जर्सी पहनकर खेलने उतरते थे. आईसीसी ने इसको लेकर उनको कहा कि कोई भी खिलाड़ी एक ही नंबर की जर्सी पहनकर खेल सकता है ऐसे नंबर नहीं बदल सकते. फैंन के सवाल के जवाब में सहवाग ने मजाक में कहा कि अब अगर वे कोई भी नंबर पहनते, तो या तो मां या पत्नी नाराज हो जातीं. दिलचस्प बात यह रही कि इन दोनों नंबरों में से कोई भी उनके लिए लकी साबित नहीं हुआ और 2007 में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. इसके बाद सहवाग ने बिना नंबर की जर्सी पहनने का फैसला किया, ताकि किसी की नाराजगी न हो. यह फैसला उनके लिए फायदेमंद रहा और भारत ने 2011 में वर्ल्ड कप जीत लिया.
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15 साल से ज्यादा वक्त से खेल पत्रकारिता से सक्रिय. Etv भारत, ZEE न्यूज की क्रिकेट वेबसाइट में काम किया. दैनिक जागरण वेबसाइट में स्पोर्ट्स हेड रहा. ओलंपिक, कॉमनवेल्थ, क्रिकेट और फुटबॉल वर्ल्ड कप कवर किया. अक्टूब…और पढ़ें
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