क्या है पूरा मामला?
यह समझना जरूरी है कि यह मामला सीधे तौर पर प्रतिबंधित दवाओं के सेवन (डोपिंग) का नहीं है, बल्कि नियमों की अनदेखी का है। दरअसल, यशस्वी और शेफाली नाडा के ‘रजिस्टर्ड टेस्टिंग पूल’ (RTP) का हिस्सा हैं। नियमानुसार, इन खिलाड़ियों को हर दिन का एक घंटा और एक निश्चित स्थान पहले से बताना होता है, जहां डोपिंग अधिकारी कभी भी सैंपल लेने पहुंच सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शेफाली वर्मा 7 नवंबर 2023 को और यशस्वी जायसवाल 17 दिसंबर 2023 को अपने बताए गए स्थान पर मौजूद नहीं मिले। जब अधिकारी वहां पहुंचे, तो खिलाड़ी गायब थे। इसके बाद नाडा ने फरवरी 2024 में इनसे जवाब मांगा था, लेकिन दोनों की ओर से कोई उत्तर नहीं मिलने पर अब इसे आधिकारिक तौर पर उनका ‘पहला मिस्ड टेस्ट’ दर्ज कर लिया गया है।
कितनी गंभीर है यह चुनौती?
गौरतलब हो कि एथलीटों के लिए एंटी-डोपिंग नियम बेहद सख्त हैं। अगर कोई खिलाड़ी 12 महीने के भीतर 3 बार मिस्ड टेस्ट का दोषी पाया जाता है, तो इसे डोपिंग नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
यदि कोई खिलाड़ी 3 बार टेस्ट मिस करता है और अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर पाता, तो उस पर 2 साल तक का प्रतिबंध लग सकता है। यशस्वी और शेफाली के लिए यह पहली गलती (वार्निंग) है, लेकिन भविष्य के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है।
BCCI और ICC को दी गई जानकारी
नाडा ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को भेज दी है। फिलहाल यशस्वी जायसवाल IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए खेल रहे हैं और शेफाली वर्मा जून 2026 में होने वाले महिला टी20 वर्ल्ड कप की तैयारियों में जुटी हैं। ऐसे में इस नोटिस ने उनकी मानसिक तैयारियों पर थोड़ा दबाव जरूर बनाया है।
फिलहाल दोनों खिलाड़ियों को अपनी सफाई देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है। चूंकि यह उनकी पहली गलती है, इसलिए उनके करियर पर अभी कोई तत्काल खतरा नहीं है। हालांकि, अगले कुछ महीनों तक उन्हें अपनी लोकेशन की जानकारी को लेकर बेहद सतर्क रहना होगा, क्योंकि दो और गलतियां उन्हें क्रिकेट के मैदान से दूर कर सकती हैं।
क्या होता है ‘वेयरअबाउट्स’ नियम?
खिलाड़ियों को ‘एंटी-डोपिंग एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ (ADAMS) पोर्टल पर अपनी लोकेशन अपडेट करनी होती है। इसमें शामिल अन्य प्रमुख नाम शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, ऋषभ पंत, जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के भी हैं।
पृथ्वी शॉ पर लग चुका है बैन
बता दें, ऐसा ही एक मामला 2019 में पृथ्वी शॉ केस की याद दिलाता है। हालांकि, शॉ का मामला अलग था। उन्होंने अनजाने में प्रतिबंधित पदार्थ (Terbutaline) वाली खांसी की दवाई पी ली थी, जिसके कारण उन पर 8 महीने का बैन लगा था। यशस्वी और शेफाली का मामला फिलहाल सिर्फ लोकेशन की जानकारी न देने तक सीमित है।
Discover more from CRICKET NEWS
Subscribe to get the latest posts sent to your email.