Most consecutive maiden overs in Test cricket: क्रिकेट इतिहास में जब भी सबसे ‘कंजूस’ गेंदबाज की बात होती है तब भारत के बापू नाडकर्णी का नाम सबसे ऊपर आता है. 12 जनवरी 1964 को मद्रास (अब चेन्नई) में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में उन्होंने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया जो आज भी अटूट है. नाडकर्णी ने लगातार 21 ओवर मेडन फेंकने का विश्व रिकॉर्ड बनाया, यानी लगातार 131 गेंदों तक इंग्लैंड के बल्लेबाज एक भी रन नहीं बना सके.
उस दिन मैदान पर कुछ ऐसा होने वाला था जो न उससे पहले कभी हुआ और न ही उसके बाद कभी देखा गया. बापू नाडकर्णी (Bapu Nadkarni) ने गेंदबाजी शुरू की और फिर शुरू हुआ ‘मेडन ओवर्स’ का एक ऐसा अंतहीन सिलसिला, जिसने अंग्रेज बल्लेबाजों के धैर्य की परीक्षा ली. बापू नाडकर्णी ने एक के बाद एक मेडन ओवर फेंकने शुरू किए. इंग्लैंड के बल्लेबाज ब्रायन केन और केन बैरिंगटन क्रीज पर मौजूद थे, लेकिन नाडकर्णी की गेंदें उनके लिए किसी अनसुलझी पहेली जैसी बन गई थीं. ओवर दर ओवर बीतते गए.1, 5, 10, 15 और फिर देखते ही देखते लगातार 21 ओवर मेडन हो गए. उनकी इकॉनमी रेट सिर्फ 0.15 रही.

बापू नाडकर्णी ने 131 गेंदें डॉट फेंकी
क्रिकेट के आंकड़ों में यह किसी चमत्कार से कम नहीं था. उन्होंने लगातार 131 गेंदें डॉट फेंकी. इंग्लैंड के बल्लेबाज एक-एक रन के लिए तरस रहे थे, लेकिन नाडकर्णी की लेंथ इतनी सटीक थी कि गेंद को हिट करना तो दूर, उसे ढंग से छूना भी मुश्किल हो रहा था. हैरानी की बात यह थी कि 32 ओवर गेंदबाजी करने के बावजूद उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला, लेकिन उनकी इस गेंदबाजी ने इंग्लैंड की रन गति पर ऐसा ब्रेक लगाया कि पूरी टीम दबाव में आ गई. इस पारी में उन्होंने कुल 32 ओवर डाले, जिसमें से 27 ओवर मेडन रहे. पूरे स्पेल में उन्होंने सिर्फ 5 रन खर्च किए.
सटीक लाइन-लेंथ के जादूगर थे बापू नाडकर्णी
बताया जाता है कि बापू नाडकर्णी नेट प्रैक्टिस के दौरान पिच पर एक सिक्का रख देते थे और घंटों अभ्यास करते थे कि उनकी हर गेंद उसी सिक्के पर गिरे. उनकी यही मेहनत मद्रास टेस्ट में रंग लाई. वह इतने अनुशासित गेंदबाज थे कि कहा जाता था कि अगर बल्लेबाज शॉट न मारना चाहे, तो नाडकर्णी उसे रन बनाने का कोई मौका नहीं देते थे.आज के दौर में जहां टी-20 और वनडे क्रिकेट के कारण बल्लेबाजों का दबदबा बढ़ गया है. बापू नाडकर्णी का यह महारिकॉर्ड आज भी कोई गेंदबाज नहीं तोड़ पाया है. टेस्ट क्रिकेट में लगातार 21 मेडन ओवर फेंकना गेंदबाजक का मानसिक मजबूती और अविश्वसनीय नियंत्रण को दिखाता है.

60 साल से अटूट रिकॉर्ड का टूटना नामुमकिन
बापू नाडकर्णी ने भारत के लिए 41 टेस्ट मैच खेले और 88 विकेट लिए. इसके अलावा उन्होंने एक शतक और सात अर्धशतक की मदद से 1414 रन बनाए. 191 फर्स्ट क्लास मैचों में नाडकर्णी के नाम 500 विकेट दर्ज हैं. उन्होंने 8880 रन बनाए हैं जिसमें 14 शतक और 46 अर्धशतक शामिल है. लेकिन 1964 का वह स्पेल उन्हें हमेशा के लिए अमर कर गया. जब 2020 में उनका निधन हुआ, तो पूरी क्रिकेट जगत ने उन्हें ‘सटीकता का पर्याय’ मानकर श्रद्धांजलि दी. बापू नाडकर्णी की यह कहानी हमें सिखाती है कि क्रिकेट केवल ताकत का खेल नहीं है, बल्कि यह धैर्य, अनुशासन और एकाग्रता की भी परीक्षा है. उनका यह रिकॉर्ड पिछले 62 सालों से अटूट है और शायद आने वाले कई दशकों तक इसे तोड़ पाना नामुमकिन होगा.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
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