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सूर्यकुमार ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल को भारत के टी20 क्रिकेट में बढ़ते दबदबे का कारण बताया. उनके कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम ने 52 में से 42 टी20 मैच जीते हैं. एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में सूर्यकुमार ने मौजूदा टीम को भारत की सबसे अच्छी टी20 टीम बताया.
कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा कि हमारा सिस्टम इतना मजबूत है कि वर्ल्ड कप में 3 भारतीय टीम को खिला सकते है
सूर्यकुमार ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल को भारत के टी20 क्रिकेट में बढ़ते दबदबे का कारण बताया. उनके कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम ने 52 में से 42 टी20 मैच जीते हैं. एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में सूर्यकुमार ने मौजूदा टीम को भारत की सबसे अच्छी टी20 टीम बताया. उन्होंने कहा कि आईपीएल, फ्रेंचाइजी क्रिकेट और घरेलू क्रिकेट से हर साल नए खिलाड़ी निकल रहे हैं, इसलिए जितनी चाहें उतनी टी20 टीमें बनाई जा सकती हैं. उन्होंने कहा कि भारत का बेस इतना मजबूत है कि दो या तीन अंतिम एकादश तैयार की जा सकती है और यह कोई कूटनीतिक जवाब नहीं है, सच में हमारा ढांचा इतना मजबूत है कि इसमें कोई शर्म नहीं है.
हारने से नफरत है
सूर्यकुमार ने टीम की सफलता का श्रेय सभी खिलाड़ियों और स्टाफ के साझा प्रयासों को दिया और कहा कि इसी वजह से टीम ने 80 प्रतिशत जीत हासिल की. उन्होंने बताया कि द्विपक्षीय मैच और आईसीसी टूर्नामेंट में फर्क होता है, इसलिए टीम को विश्व कप में जीत की लय बनाए रखने के लिए प्रेरित करना पड़ा. उन्होंने कहा कि वह आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते लेकिन हारना पसंद नहीं है, और ड्रेसिंग रूम में सभी एक दिशा में सोचते हैं तो ही यह प्रतिशत हासिल किया जा सकता है.
टी-20 में बल्लेबाजी करना तात्कालिक प्रतिक्रिया
सूर्यकुमार ने टी20 बल्लेबाजी के बारे में कहा कि बल्लेबाजी 70 से 75 प्रतिशत तात्कालिक प्रतिक्रिया होती है और बाकी 25 प्रतिशत स्वाभाविक होती है, मैदान पर उतरने के बाद खिलाड़ी ऑटोपायलट मोड में होते हैं और हालात के अनुसार खेलते हैं. उन्होंने कहा कि साहसी और लापरवाह होने में बहुत बारीक अंतर है, वह साहसी रहना पसंद करते हैं, लेकिन अगर हालात के अनुसार जोखिम भरे शॉट खेलने की जरूरत है तो वह करते हैं, जितना ज्यादा जोखिम होगा उतना अच्छा फल मिलेगा.
गंभीर है बड़े भाई जैसे
कोच गौतम गंभीर के साथ संबंधों के बारे में उन्होंने बताया कि टीम चुनते समय उनकी सोच समान थी, जो 15 नाम सुझाए थे उनमें से 14 एक जैसे थे, इसका मतलब है कि दोनों एक सा सोचते हैं, जब लक्ष्य साफ हो तो कोई मतभेद नहीं होते, सिर्फ चर्चा होती है. उन्होंने कहा कि पेशेवर सफलता ने उनके निजी संबंधों को नहीं बदला है, वह अभी भी गंभीर को ‘गौती भाई’ बुलाते हैं, यह बड़े भाई और छोटे भाई जैसा रिश्ता है.
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